मैं मिट्टी का तन
और इस तन की रूह... तुम हो
मैं भूली बिसरी याद
और उन यादों की कसक... तुम हो
मैं बेमंज़र सी ज़िंदगी
और उसकी पहचान... तुम हो
मैं काली रात की स्याही
और चंदा की चांदनी... तुम हो
मैं विरह का दर्द
और उस दर्द की दवा... तुम हो
मैं पलकों पे ठहरा आँसू
और मेरे होठों की मुस्कान... तुम हो
मेरी तन्हा सी ज़िन्दगी का
हमसफ़र बस... तुम ही हो
मेरी अधख़ुली पलकें
और उसके ख्वाब... तुम हो
मैं बहती नदिया सी
उसकी चंचल धारा... तुम हो
मैं सूखी रेत सी
और बारिश की बूँदें... तुम हो
#SwetaBarnwal
और इस तन की रूह... तुम हो
मैं भूली बिसरी याद
और उन यादों की कसक... तुम हो
मैं बेमंज़र सी ज़िंदगी
और उसकी पहचान... तुम हो
मैं काली रात की स्याही
और चंदा की चांदनी... तुम हो
मैं विरह का दर्द
और उस दर्द की दवा... तुम हो
मैं पलकों पे ठहरा आँसू
और मेरे होठों की मुस्कान... तुम हो
मेरी तन्हा सी ज़िन्दगी का
हमसफ़र बस... तुम ही हो
मेरी अधख़ुली पलकें
और उसके ख्वाब... तुम हो
मैं बहती नदिया सी
उसकी चंचल धारा... तुम हो
मैं सूखी रेत सी
और बारिश की बूँदें... तुम हो
मैं #श्वेता प्यासी धरती सी
और बरसता सावन... तुम हो
#SwetaBarnwal

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