कभी आँखों से छलकते हैं,
कभी कागज पर उतरते हैं,
कुछ ऐसे भी दर्द हैं ज़िन्दगी में,
जो ताउम्र दिल में ही पलते हैं...
#SwetaBarnwal
कभी कागज पर उतरते हैं,
कुछ ऐसे भी दर्द हैं ज़िन्दगी में,
जो ताउम्र दिल में ही पलते हैं...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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