हम उन्मुक्त गगन के परिंदें हैं,
हमें सोने चांदी का मोह नहीं,
बस तुम्हारा साथ मिल जाए,
फ़िर कुछ और की चाह नहीं...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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