Thursday, 5 July 2018

लड़खड़ाये जो कदम 
तो उंगली उठाते हैं  लोग, 
दिल पे पड़े बोझ को #श्वेता 
भला कहाँ देख पाते हैं लोग...

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...