ताउम्र नहीं भूल पाऊँगी
बरसात की वो रात,
एक अनजानी सड़क पर
एक अनजाने से वो मुलाकात...
हाए...! उनकी वो सादगी
उनके आँखों में वो सच्चाई,
एक दिलकश अंदाज़,
उसपे वो दिलनशी आवाज़,
दिल में तूफ़ान जगाती
वो जज़्बात की रात...
बरसात की वो रात,
एक अनजानी सड़क पर
एक अनजाने से वो मुलाकात...
हाए...! उनकी वो सादगी
उनके आँखों में वो सच्चाई,
एक दिलकश अंदाज़,
उसपे वो दिलनशी आवाज़,
दिल में तूफ़ान जगाती
वो जज़्बात की रात...
ताउम्र नहीं भूल पाऊँगी
बरसात की वो रात...
वो चौड़े से शाने पे
अनचाहे झुकना मेरा,
बारिश की फीसलन मे
पावों का लड़ख़ड़ाना मेरा,
बड़ी ही शालीनता से
वो मुझको संभालना तेरा,
कभी किसी ने देखी ना सुनी
ऐसी अहसासों की रात...
ताउम्र नहीं भूल पाऊँगी
बरसात की वो रात...
सुर्ख आँखों से
वो चुपके से देखना तेरा,
मुझसे छुप कर
मुझी से नजरें मिलाना तेरा,
चोरी छुपे नजरों के तीर
मेरे दिल पे वो चलाना तेरा,
पानी में आग लगाती
वो मदहोश सी रात...
ताउम्र नहीं भूल पाऊँगी
बरसात की वो रात...
मेरे शब्दों में बस जाए
ऐसी शख्सियत थी तेरी,
एक जादू सी चलाती
वो ऐसी मासूमियत तेरी,
आसमां से उतरी हुई
जैसे वो आसमानी सी रात...
ताउम्र नहीं भूल पाऊँगी
बरसात की वो रात...
साथ साथ मेरे
वो चलना तेरा,
ख़ामोश रह कर भी
सब कुछ कहना तेरा,
बिन छुए मुझे
मेरे रूह में समाना तेरा,
हकीकत में मिली
जैसे वो ख्वाबों की रात...
ताउम्र नहीं भूल पाऊँगी
बरसात की वो रात...
एक अनजानी सड़क पर
एक अनजाने से वो मुलाकात...
#SwetaBarnwal

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