Wednesday, 30 May 2018

हमने दिए थे कल जिन्हें अपनी झोली के फूल बड़े अरमान से,
वो लुटा आए उन फूलों को किसी और की महफ़िल में बड़ी शान से...

#SwetaBarnwal

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...