कुछ कहा तुमने भी नहीं,
कुछ सुना हमने भी नहीं,
ज़िन्दगी के इस कश्मकश मे,
कहने सुनने को कुछ बाकी रहा भी नहीं...
#SwetaBarnwal
कुछ सुना हमने भी नहीं,
ज़िन्दगी के इस कश्मकश मे,
कहने सुनने को कुछ बाकी रहा भी नहीं...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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