तुझसे मिली हूँ जबसे
मेरी ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी है,
जैसे बंज़र भूमि मे पड़ी बीज
अब खिल कर लहलहाने लगी है...
#SwetaBarnwal
मेरी ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी है,
जैसे बंज़र भूमि मे पड़ी बीज
अब खिल कर लहलहाने लगी है...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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