Monday, 21 May 2018

तुम भी वही,
किस्सा भी वही,
मेरी चाहत भी वही,
और तुम्हारी बेरुखी भी वही,
एक ही बात
मैं कितनी बार लिखूँ...


#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...