तुम भी वही,
किस्सा भी वही,
मेरी चाहत भी वही,
और तुम्हारी बेरुखी भी वही,
एक ही बात
मैं कितनी बार लिखूँ...
#SwetaBarnwal
किस्सा भी वही,
मेरी चाहत भी वही,
और तुम्हारी बेरुखी भी वही,
एक ही बात
मैं कितनी बार लिखूँ...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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