Tuesday, 22 May 2018

अक्सर रात की तन्हाइयों में उन्हें हमारी याद सताती है, 
पता नहीं..! मोहब्बत उन्हें हमारे दिल से है या हमारे जिस्म से...


#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...