Tuesday, 29 May 2018

माना ख़ामोशी कभी ज़रूरी तो कभी मज़बूरी होती है,
पर यारा...! दिल की हसरत तो बस इज़हार से पूरी होती है...

#SwetaBarnwal

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...