Sunday, 27 May 2018

नज़रों की भाषा अब पुरानी हो गई,
कोई ख़ामोशियों को पढ़ कर दिखाए तो कोई बात हो...


#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...