नारी है कूदरत की अनमोल रचना
ऐ मर्द..! ना कर तू इसका तिरस्कार,
ऐसा ना हो अपने कोख में तुझको
रखने से एक दिन कर दे ये इंकार...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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