Sunday, 7 October 2018

किसी शाम आ जाओ तुम चाय पर...

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर
हमसे मिलने
किसी बहाने से,

मिल बैठेंगे संग संग
उड़ेंगे जज़्बातों के रंग
दो घड़ी दो पल
या फिर दो लम्हें,
मुट्ठी में बांध
कैद कर उन्हें ले जाएंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

कुछ यादों के 
किस्से बुनेंगे, 
कुछ अहसासों के
धुएं उड़ेंगे,
कुछ कदम हम तुम
संग चलेंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

कुछ अपनी कहेंगे
कुछ तुम्हारी सुनेंगे,
जी भर कर फिर हम
बातें करेंगे,
उन लम्हों में हम
फ़िर से सदीयां जियेंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

तेरे साने पे रख के सर 
तुझसे तेरी ही बातें करेंगे, 
कुछ रह जाए बाकि गर 
आँखों में पढ़ जाना तुम, 
उन लम्हों में ही 
सौ जन्मों को हम जियेंगे, 

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

यूँ ही साथ बैठेंगे
हंसेंगे हसाएंगे,
कुछ कहकहे लगाएंगे
कोई धुन गुनगुनाएंगे,
तुम सुर देना
और हम ताल मिलाएँगे,
एक दूजे की बाहों में
हम यूँ ही झूल जाएंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर

बहुत थक चुकी है ज़िंदगी
इस कदर भागते भागते,
कुछ पल सुकून से
हम तुम साथ बिताएंगे
इस भागम भाग की ज़िंदगी में
कुछ लम्हें खुशी की जिएंगे,

किसी शाम आ जाओ
तुम चाय पर
हमसे मिलने
किसी बहाने से... 


#SwetaBarnwal




3 comments:

Prakash Chandra said...

Nice one ...

Unknown said...

Kb aye ji Chai pr...
Hasi majak krenge..
Kuch bate krenge...
Kuch tumhari sunenge...
Kuch apni khenge....
Badi byast si ho gyi he jindagi...
Purane lmho ko fir se jiyenge...
Bhut dino se talab thi muskurane ki...
Chalo chale khi fir se kahkahe lagayenge....

Sweta kumari Barnwal said...

जब दिल करे आपका,
चले आइए चाय पे,

कुछ गुज़र गए हैं लम्हें,
उन्हें फिर से कैद कर लेंगे,
जी लेंगे फिर से उनको
जो मुट्ठी से फ़िसल गए हैं...

जब दिल करे आपका,
चले आइए चाय पे,

बातेँ कुछ अनकही कुछ अनसुनी सी,
रह गई थी जो दरमियाँ उसे आज कहेंगे,
आप शब्द बन जाना हम आवाज बनेंगे,
कुछ इस तरह हाल-ए-दिल बयां करेंगे,

जब दिल करे आपका,
चले आइए चाय पे,

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