Friday, 4 May 2018

अब तो थक चुकी हूँ मैं...

इस भागम भाग भरी जिंदगी से 
अब तो थक चुकी हूँ मैं, 
रोज नित नए झमेलों से 
अब तो पक चुकी हूँ मैं, 

रोज सवेरे उठती हूँ मैं, 
उम्मीदों के पंख सजाए, 
अपने सारे गमों को 
बाँध रखती हूँ परे मैं, 
बहुत दुनिया देखी है
दुनियादारी का है ज्ञान मुझे,
संघर्षों से लड़ कर
अब तो परिपक्व हो चुकी हूँ मैं,
इस भागम भाग भरी जिंदगी से 
अब तो थक चुकी हूँ मैं,

बड़ी मुश्किल से दो पल की 
नींद नसीब होती है मुझे, 
सपनों और हकीकत के बीच 
उलझ चुकी हूँ मैं, 
कोई साथ नहीं देता 
जब अंधेरा घना होता है, 
अपना साया भी दगा दे जाएगा
ये अब जान चुकी हूँ मैं,
सबसे धोखा खाते खाते 
अब तो जाग चुकी हूँ मैं,
इस भागम भाग भरी जिंदगी से 
अब तो थक चुकी हूँ मैं...

#SwetaBarnwal 

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