Sunday, 11 February 2018

मैं मर्द हूँ...

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ, 
ऊँचा कद, चौड़ा सीना, 
मूछों पे ताव और मन में अभिमान 
यही तो है एक मर्द की पहचान... 

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ, 
औरतों को पैर की जूती समझता हूँ, 
उसे खरीदुं, बेचुं, जलाउं या तड़पाउं,
एक भोग्या से ज्यादा नहीं है उसकी पहचान...

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ,
रस्मों-रिवाज़ों, व्रत-उपवास, नहीं मानता मैं,
क्यूंकि ये सब बनाया है औरतों के लिए हमने,
जिससे बचे ना उनके पास वक़्त और शक्ति... 

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ,
मेरे लिए कोई वस्त्र परिधान नहीं, कोई बंदिश नहीं, 
मैं दुनिया समाज के बंधनों से बिल्कुल आज़ाद हूँ, 
नाही कोई वादे से बँधा हूँ मैं, ना किसी कसम से... 

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ,
मुझे स्त्री चाहिए बिल्कुल अनछुई, कोमल, पवित्र, 
चाहे बनाना हो अर्धांगिनी या करना हो खिलवाड़, 
औरतें रहे पर्दे मे, चाहे खोट हो मेरी नज़रों में...

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ,
मेरे लिए उम्र की कोई दीवार नहीं,
ढलती उम्र में भी कर सकता हूँ दूजा ब्याह,
वैधव्य का मुझ पर कोई बोझ नहीं...

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ,
उम्र की सीमा, वैधव्य और पर्दा ये सब औरतों के लिए है,
ताकि दबा कर रख सकूं उसे और कर सकूं अय्याशी,
मैं हूँ शक्ति, सामर्थ्य और सत्य, सारा जग मुझमे समाहित है...

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ,
मैं भले ही कोई महान कृत्य करूँ या ना करूँ,
मर्द रूप में जन्म लेना ही बहुत है मर्द कहलाने के लिए, 
जरूरी नहीं कि मैं निर्बल असहाय स्त्रियों की रक्षा करूँ...

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ,
मुझे किसी चरित्र के प्रमाण की जरूरत नहीं है,
क्यूंकि मैं स्त्री नहीं हूँ, मुझे दुनिया समाज का डर नहीं है,
मैं भूत, भविष्य और वर्तमान हर युग में परिपूर्ण हूँ...

मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ...
मैं मर्द हुंँ, हाँ मैं मर्द हूँ...

#SwetaBarnwal 

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