बेटियों को जंजीरों में बांधने वाले,
थोड़ा बेटों को भी डाँट लिया करो,
छोटे कपड़े ग़लत है बेटियों के
तो ओछी नज़रें कहाँ सही है बेटों के.
जल्दी घर आना, कहीं रुक मत जाना,
सही कहते हो बेटियों से,
पर यही बात फिर क्यूँ नहीं कहते बेटों से,
क्यूँ चुप्पी सध जाती है होंठों पे,
बेटियों के mobile check करना याद है,
भूल क्यूँ जाते हो बेटों के internet को,
बेटियों के दोस्त भी गंवारा नहीं तुझको,
बेटों के आवारागर्दी पे भी नज़रअंदाज़.
सभ्यता और संस्कृति के नाम पर
हर बार बेटियों को सूली पर चढ़ाने वाले,
बंद करो अपनी ये दोहरी नीति
थोड़ा समझा लो बेटों को भी तो जी ले बेटियाँ भी...
#SwetaBarnwal
थोड़ा बेटों को भी डाँट लिया करो,
छोटे कपड़े ग़लत है बेटियों के
तो ओछी नज़रें कहाँ सही है बेटों के.
जल्दी घर आना, कहीं रुक मत जाना,
सही कहते हो बेटियों से,
पर यही बात फिर क्यूँ नहीं कहते बेटों से,
क्यूँ चुप्पी सध जाती है होंठों पे,
बेटियों के mobile check करना याद है,
भूल क्यूँ जाते हो बेटों के internet को,
बेटियों के दोस्त भी गंवारा नहीं तुझको,
बेटों के आवारागर्दी पे भी नज़रअंदाज़.
सभ्यता और संस्कृति के नाम पर
हर बार बेटियों को सूली पर चढ़ाने वाले,
बंद करो अपनी ये दोहरी नीति
थोड़ा समझा लो बेटों को भी तो जी ले बेटियाँ भी...
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