Tuesday, 20 February 2018

बड़े नाज़ुक होते हैं ये दिलों के रिश्ते, 
होठों पे लाओ तो अक्सर टूट जाते हैं,
डरती हूं इज़हार करने से,
खिलौना समझ अक्सर लोग खेल जाते हैं,
जानती हूँ, हसीन होता है ये प्यार का रिश्ता,
पर धोखे से अक्सर सारे ख्वाब टूट जाते हैं...

#SwetaBarnwal

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...