Monday, 19 February 2018

कुछ वक़्त मैं तेरा साथ चाहती हूँ,
आँखों में अनदेखी बरसात चाहती हूँ,
एक बार फिर वो हसीन मुलाकात चाहती हूँ,
कभी ना बीते जो, मैं वो रात चाहती हूँ,
तेरे साथ चल सकूं कुछ कदम,
मैं वो खुशनुमा सफ़र साथ चाहती हूँ, 
सुना है आज भी बहुत चाहते हो तुम मुझे,
बस होठों पर एक बार फिर इज़हार चाहती हूँ...

#SwetaBarnwal

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...