Saturday, 17 February 2018

शादी का पहला दिन...

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन
खुशी और गम दोनों के बीच
मिलन और जुदाई का संगम,
नए रिश्तों में बंधने की खुशी थी
तो पुराने रिश्तों से दूरी का दर्द भी,

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन
मंडप पे बैठी थी मैं 
चारों ओर सारे संबंधी थे, 
फिर भी अकेलापन था, 
ना जाने वो कैसा अहसास था, 

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन
पंडित जी ने कहा जब
कन्यादान संपन्न हुआ यजमान,
मानो जान ही निकल गई मेरी,
जब बाबुल ने मेरा हाथ तुम्हारे हाथ में दिया,

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन,
माँ-बाबा की लाडली थी मैं,
इन रस्मों ने पल मे बेगाना कर दिया,
इस सोच ने निष्प्राण कर दिया मुझे,
मूर्छित हो गिर पड़ी थी मैं, 

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन,
अगली सुबह आया वक़्त विदाई का,
खुशी और गम से नम थी हर आंखें,
आज से पराई हो गई मैं उनके लिए,
दुनिया का यही दस्तूर सुनाया सबने,

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन,
पैरों मे पायल, बिछुआ और माहवार लिए, 
ससुराल की चौखट पर पहली बार पांव रखा, 
आंखों में अनगिनत सपने और दिल मे अरमान लिए 
पुरानी ज़िन्दगी को छोड़ नई ज़िंदगी का आह्वान किया, 

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन,
लोगों की भीड़ मे संभालती कभी खुद को तो कभी घूँघट को, 
अल्हड़ बेटी से अचानक शिष्ट बहु का किरदार निभाने को, 
कर रही थी मैं हर तरह से ख़ुद को तैयार, 
कोई चुक ना हो मुझसे, इसका भी था मुझे ख्याल... 

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन,
आख़िर में वो घड़ी भी आई, जिसका इंतज़ार हर जोड़े को होता है,
यूँ सहमी-सकुचाई सी ख़ुद मे सिमटी हुई तक रही थी आपकी राह,
आपका यूँ दबे पांव आना, हमारा घूँघट उठाना और धीमे से कहना,
हाए ये खूबसूरती और मासूमियत, कोई खता ना हो जाए हमसे... 

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन,
आपका इस कदर हमे बाहों मे भरना और प्यारी बातें करना,
पूरी ज़िन्दगी के सपने एक रात मे हमने आपके साथ देख लिए,
इस दुनिया से अलग है आपकी अदा और आपका अंदाज़, 
आपका साथ, प्यार और विश्वास ने आसान कर दिया हमारा सफ़र...

आज भी याद है मुझे 
हमारी शादी का वो दिन...

#SwetaBarnwal 

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