Friday, 23 February 2018

तुझसे मिलना भी इत्तेफाक था, 
मिल कर बिछड़ना भी इत्तेफाक था,
मेरी ज़िन्दगी जो बर्बाद हुई,
वो भी बस एक इत्तेफाक था...

#SwetaPrakash 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...