Thursday, 8 February 2018

नारी का वजूद

नारी के अंतः मन को, क्या कभी समझ ना कोई पाएगा,,,
दिल है जिसका प्यार का सागर, क्या कोई पार ना पाएगा... 

खुद हँसती है ख़ुद रोती है, कोई तुझको क्या समझाएगा,,,
तेरी शक्ति का कोई तोड़ नहीं, कोई तुझको क्या हराएगा... 

आँचल में तेरे दूध छुपा, आँखों में गंगाजल पानी है,,, 
दिल में तु अंगार लिए, होंठों पर प्यार की कहानी है... 

प्यार की एक मूरत है तू, देवत्व की तू निशानी है,,,
माँ है और बहन भी है तू, बेटी है तू और अर्धांगिनी है...

हर रिश्ते में परिपूर्ण है तू, हर रिश्ते का आधार है तू,,,
भगवान भी धरा पर जन्म लेते, पाने को जिसका दुलार है तू...

तुझ बिन सृष्टि का औचित्य नहीं, कौन ये तुझको याद दिलाएगा,,,
जग को तू ही जीवन देने वाली, कौन ये तुझको अब बतलाएगा...

घर को स्वर्ग बनाने वाली, तुझे अपनी लड़ाई लड़नी है,,,
अबला नहीं तू शक्ति है, ये बात दुनिया को समझानी है...

तुझे सीता बन अब नहीं जलना है, ना राधा बन तड़पना है,,,
तुझे मीरा बन ज़हर नहीं पीना है, अब दुर्गा बन बस लड़ना है...

अब तुझे खुद को ये समझाना होगा, दुनिया को दिखालाना होगा,,,
लक्ष्मी भी तू, दुर्गा भी तू, और वक़्त पड़े तो काली भी बन जाना होगा...

#SwetaBarnwal 

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