गैरों के दिए ज़ख्मों पर
आँसू क्यूँ बहाना,
अंधेरा होने पर हमने अक्सर अपने साये को भी
साथ छोड़ता देखा है...
#SwetaPrakash
आँसू क्यूँ बहाना,
अंधेरा होने पर हमने अक्सर अपने साये को भी
साथ छोड़ता देखा है...
#SwetaPrakash
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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