कुछ रिश्ते क्षण में टूट गए,
कुछ बिन बोले ही रूठ गए,
कुछ साथ चले फ़िर छुट गए,
काँच के जैसे सारे फ़ुट गए...
यादों की गठरी खोलूँ जो,
इन आँखों से गर कुछ बोलूँ तो,.
बिन बारिश फ़िर बरसात हुई,
और तन्हाई का आलम साथ हुई...
जिस को समझा था अपना,
बन कर निकला वो एक सपना,
मतलब सबके सधते गए,
हम यार ज़ुदा होते गए...
रिश्ते.! जैसे रेत की बनी दीवारें हैं,
यहाँ कोई अपना नहीं हमारे हैं,
जिन्हें अपना अपना कहते हैं,
बस वही हमे लूट ले जाते हैं...
#SwetaBarnwal
कुछ बिन बोले ही रूठ गए,
कुछ साथ चले फ़िर छुट गए,
काँच के जैसे सारे फ़ुट गए...
यादों की गठरी खोलूँ जो,
इन आँखों से गर कुछ बोलूँ तो,.
बिन बारिश फ़िर बरसात हुई,
और तन्हाई का आलम साथ हुई...
जिस को समझा था अपना,
बन कर निकला वो एक सपना,
मतलब सबके सधते गए,
हम यार ज़ुदा होते गए...
रिश्ते.! जैसे रेत की बनी दीवारें हैं,
यहाँ कोई अपना नहीं हमारे हैं,
जिन्हें अपना अपना कहते हैं,
बस वही हमे लूट ले जाते हैं...
#SwetaBarnwal
1 comment:
उनके ख्याल में जब बे-ख्याल होता हूँ,
ज़रा सी देर को सही बे-मिसाल होता हूँ।
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