Thursday, 22 February 2018

" मेरे मन के अंदर "

" मेरे मन के अंदर 



बेमंज़र सा मंज़र है, 
मेरे मन के अंदर... 
विरानी सी फैली है,
मेरे मन के अंदर... 

सोलह श्रृंगार कर तुम, 
आ जाओ जीवन में,
खुशियाँ बिखेर दो  तुम, 
मेरे मन के अंदर... 

बन जाओ तुम मेरी,
है एक यही तमन्ना,
धड़कन बन बस जाओ,
मेरे मन के अंदर...

(एक प्रेमी का अपनी प्रेमिका को समर्पित) 

#SwetaBarnwal 

3 comments:

Praveen kumar said...

आहा ,कहीं वो प्रेमी प्रकाश जी तो नहीं


ऐ दिल ए नादान इश्क मे यूं नादानी न किया कर
मोहब्बत मे इंतजार होता ही है ,यूं घुट घुट के न जिया कर

Praveen kumar said...

कहीं वो प्रेमी प्रकाश भैया तो नहीं


ए दिले नादान इश्क मे यूं नादानी न किया कर

इंतजार होता ही है मोहब्बत मे यूं घुट घुट के न जिया कर

Unknown said...

निकले हम दुनिया की भीड़ में तो पता चला,
कि हर वो शख्स अकेला है जो दूसरों पर भरोसा करता है।

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...