Sunday, 3 June 2018



मुकम्मल होने की चाहत तो हमे भी ना थी,
पर क्या कहूँ, नज़रअंदाज़ी सही नहीं जाती...

#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...