Wednesday, 19 September 2018

ख़ामोशी में चाहे जितना बेगाना-पन हो,
लेकिन इक आहट जानी-पहचानी होती है... |

#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...