Friday, 21 September 2018

रूठा वक़्त...

रूठा जो वक़्त तो मना लेंगे हम,
रूठे यार को कैसे बुला पाएंगे हम,
यादों से तेरी दिल बहला लेंगे हम,
आँखों से अपने तेरे आँसू बहा लेंगे हम,
गिले शिकवे दिलों के कैसे मिटा पाएंगे हम,
सिलसिले चाहतों के कैसे दुहरा पाएंगे हम,
काश..! ये आईनें दिलों को भी पढ़ पाते,
राज़ उनके दिल के हम भी जान जाते,
ना राहें हैं अपनी और ना मंज़िल का पता,
एक मुसाफ़िर ही सही हम भी बन जाते,
आँखें अपनी हैं इसमें सजे ख्वाब भी अपने,
काश..! उन ख्वाबों के हकदार हम भी बन पाते...


#SwetaBarnwal

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