Saturday, 29 September 2018

प्रेम...

प्रेम
झलकता मातृत्व है,
बहना की राखी है,
भाई का प्यार है,
दोस्तों की दोस्ती है...

प्रेम
समर्पण है सादगी है,
सच्चाई है आस्था है,
प्रेम दो आत्माओं का मिलन है
प्रेम ज़िंदगी है...

प्रेम
माँ की लोरी है,
पिता की डांट है,
भाई बहन की नोंक झोंक है,
दोस्तों की शरारत है...

प्रेम
कान्हा की बांसुरी की तान है,
प्रभु राम का बलिदान है,
सीता माता का मान है,
राधा का त्याग है
तो मीरा का अभिमान है...

प्रेम
प्रेम और कुछ नहीं,
प्रेम तो बस प्रेम है,
अल्फाज़ों से परे,
भावनाओं का अद्भुत संगम है...

प्रेम
जो दिखता कहीं नहीं है,
पर होता हर जगह है,
सृष्टि का सार है ये,
जीवन का श्रृंगार है ये,
प्रेम तो बस प्रेम है,
दूसरा इसका कोई आधार नहीं...


#SwetaBarnwal

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