वो ना बेवफ़ा था ना दिल का बुरा था,
बस किस्मत मे ना अपने मिलना लिखा था,
वो मेरी हर शायरी का आईना था,
मेरी रूह से जैसे उसका बावस्ता था,
वो मेरे दिन का चैन रातों का सुकून था,
इस बात से वो भी अनजान ना था,
यूँ तो वो हर बात में जुदा था मुझसे,
फ़िर भी मेरे हर एहसास मे वो बस्ता था,
उसकी हर कही को इस दिल ने माना,
उसे मुरत बना कर इस दिल ने पूजा,
इस कदर बस गया था वो साँसों में मेरे,
जैसे मंदिर में दिया जलाया हो किसी ने,
अचानक एक झटके में सब कुछ बदल गया,
एक झपकी सी लगी और मंजर बदल गया,
सब कुछ ठहर गया था और वो दूर जा रहा था,
कदमों के नीचे से मेरे जैसे जमीन खिसक रही थी,
संजोया था जिस दिल में मैंने वो ख्वाब सलोने,
ताश के पत्तों सा वो घर बिखर रहा था,
शायद रही होगी जरूर उसकी कोई मजबूरी,
जो तोड़ कर इस कदर वो मेरा दिल जा रहा था,
बस किस्मत मे ना अपने मिलना लिखा था,
वो मेरी हर शायरी का आईना था,
मेरी रूह से जैसे उसका बावस्ता था,
वो मेरे दिन का चैन रातों का सुकून था,
इस बात से वो भी अनजान ना था,
यूँ तो वो हर बात में जुदा था मुझसे,
फ़िर भी मेरे हर एहसास मे वो बस्ता था,
उसकी हर कही को इस दिल ने माना,
उसे मुरत बना कर इस दिल ने पूजा,
इस कदर बस गया था वो साँसों में मेरे,
जैसे मंदिर में दिया जलाया हो किसी ने,
अचानक एक झटके में सब कुछ बदल गया,
एक झपकी सी लगी और मंजर बदल गया,
सब कुछ ठहर गया था और वो दूर जा रहा था,
कदमों के नीचे से मेरे जैसे जमीन खिसक रही थी,
संजोया था जिस दिल में मैंने वो ख्वाब सलोने,
ताश के पत्तों सा वो घर बिखर रहा था,
शायद रही होगी जरूर उसकी कोई मजबूरी,
जो तोड़ कर इस कदर वो मेरा दिल जा रहा था,
वो ना बेवफ़ा था ना दिल का बुरा था,
बस किस्मत मे ना अपने मिलना लिखा था...
#SwetaBarnwal
1 comment:
Nice one
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