Saturday, 22 September 2018

मेरी ग़ज़ल हो गई...

उनसे मिली नज़र तो मेरी ग़ज़ल हो गई,
यादों में वो आए तो मेरी ग़ज़ल हो गई,

सुबह वो मिलने आए तो शाम हो गई,
उनकी जुदाई में फ़िर मेरी ग़ज़ल हो गई, 

हम याद करे और उनको ख़बर हो जाए,
समझो फ़िर मुकम्मल मेरी ग़ज़ल हो गई, 

इंतज़ार मे गुज़रे ये लम्हें साल हो गए, 
आई जो उनकी खबर मेरी ग़ज़ल हो गई,

आँसू तेरी याद में मेरे आंँखों से जो बहे,
तेरे दिल में भी चुभन हो तो मेरी ग़ज़ल हो गई,

जो वो रूठे तो हर अल्फाज़ रूठ जाए, 
वो जो आयें महफ़िल में मेरी ग़ज़ल हो गई,

तेरे आने से वीराने मे भी रौनक आ जाए, 
अल्फाज़ मिलते गए और मेरी ग़ज़ल हो गई... 

यूँ तो #श्वेता दरमियाँ हैं अपने कई फासले, 
मिल जाए जो तेरी झलक मेरी ग़ज़ल हो गई,

#SwetaBarnwal 

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