Friday, 21 September 2018

दर्द-ए-दिल...

ना तुझसे किसी वादे की उम्मीद थी,
ना कभी कुछ पाने का इरादा था,
ना ज़िंदगी भर के साथ की चाह थी,
ना कोई तुझ तक जाती मेरी राह थी,

ना ही तुझसे वफ़ा की कोई उम्मीद थी,
ना ही इस दिल में तुझे पाने की हसरत थी,
ना बेइन्तेहाँ प्यार की कोई ख्वाहिश थी,
ना ही तेरे इश्क़ की कोई आज़माइश थी,

माना इश्क़ मे हर कोई बदल जाता है,
मगर उतना भी नहीं जितना कि तुम बदले,
वफ़ा की उम्मीद जिन्हें होगी उन्हें होगी
हमे तो देखना है बस तु बेवफ़ा कितना है ..


#SwetaBarnwal

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