Sunday, 1 April 2018

मेरे दिल की दहलीज़ पे 
जो तूने रखे हैं प्यार से कदम, 
आख़िरी साँस भी 
तेरे नाम कर दूँ ऐ मेरे हमदम... 
तू चाहे ना चाहे मुझे 
ये तो है बस तेरी रज़ा, 
हम तो चाहेंगे तुझे 
इस जनम, उस जनम, हर जनम... 

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...