Wednesday, 25 April 2018

जानती हूँ कोई याद नहीं करता हमे, 
फ़िर भी बेख्याली मे जीना अच्छा लगता है... 

#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...