Monday, 30 April 2018

सब कुछ तो कह दिया 
अब कहने को कुछ बाकी नहीं यार, 
हर जज़्बात को शब्दों का रूप
देना अब मुमकिन नहीं है यार,
कुछ आँखों की भी पढ़ लो,
कभी धड़कनों की भी सुन लो,
कुछ बातों को अब तुम 
बिना कहे भी समझ लो
जो बात लबों तक आ ना पाई
उन्हें आँखों से बयां कर दो तुम,
जो भी है दिल मे तेरे कह दो,
होठों को यूँ ना सिला करो तुम
जब भी तन्हां होती हूँ
तुझे ही पुकारा करती हूँ
तुम भी तो एक बार फिर से 
मुझको आवाज़ लगा दो यार, 
तेरी हर खुशियाँ बटोर लूँ मैं 
तेरे दामन में आज सज़ा दूँ यार, 
सब कुछ तो कह दिया 
अब कहने को कुछ बाकी नहीं यार, 

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