Tuesday, 10 April 2018

नादानीयां करना चाहती हूँ...

गुज़रे हुए उन पलों को 
एक बार फ़िर से जीना चाहती हूँ, 

बहुत रो लिया अब तक 
अब फ़िर से मुस्कुराना चाहती हूँ, 

फ़िर से वही खूबसूरत शाम 
तेरे साथ कुछ कदम चलना चाहती हूँ,

तेरे कांधे पर रख के सिर,
सुकून से दो पल सोना चाहती हूँ, 

तेरी आँखों के अश्क 
मैं अपनी आँखों से बहाना चाहती हूँ,

खामोश सी हो गई है ज़िन्दगी 
कुछ पल तेरे साथ गुनगुनाना चाहती हूँ, 

एक बार अपने होठों पर
तेरे बोल को मैं सजाना चाहती हूँ, 

तेरे सीने से लग कर एक बार 
मैं तेरी ही जुस्तजू मे खो जाना चाहती हूँ,

बहुत हो गई समझदारी,  
अब थोड़ी नादानीयां करना चाहती हूँ...

#SwetaBarnwal 

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