एक रोज़ वक़्त ख़ुद मेरी दास्तां सुनाएगा,
जब बिता हुआ फ़साना उसे याद आयेगा,
आज गुरबत में गुज़र रही है ज़िन्दगी अपनी,
एक रोज इसमे भी इंद्रधनुषी रंग भर जाएगा...
किस्मत से मुझको नहीं है कोई शिकायत,
हाथों की लकीरों से नहीं कोई बावस्ता मुझको,
ना है कोई ऐहतराम मुझको इस जमाने का,
है कुछ इस कदर भरोसा अपने हौसले पे मुझको...
ज़ब्त कर रखा है हर जज़्बात दिल के अंदर,
कब कौन खेल जाए ले के दिल में प्यार का समंदर,
#श्वेता के आंँखों में है अंगार दिल में जीत का जुनून,
जो हासिल हो मंज़िल तो मिल जाए चैन-ओ-सुकून...
#SwetaBarnwal
जब बिता हुआ फ़साना उसे याद आयेगा,
आज गुरबत में गुज़र रही है ज़िन्दगी अपनी,
एक रोज इसमे भी इंद्रधनुषी रंग भर जाएगा...
किस्मत से मुझको नहीं है कोई शिकायत,
हाथों की लकीरों से नहीं कोई बावस्ता मुझको,
ना है कोई ऐहतराम मुझको इस जमाने का,
है कुछ इस कदर भरोसा अपने हौसले पे मुझको...
ज़ब्त कर रखा है हर जज़्बात दिल के अंदर,
कब कौन खेल जाए ले के दिल में प्यार का समंदर,
#श्वेता के आंँखों में है अंगार दिल में जीत का जुनून,
जो हासिल हो मंज़िल तो मिल जाए चैन-ओ-सुकून...
#SwetaBarnwal
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