Monday, 9 April 2018

मोहब्बत को ना बांधों तुम किसी बंधन में,
ये वो परिंदा है जो उड़ता है मस्त गगन मे...

#SwetaBarnwal

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...