Wednesday, 11 April 2018

जो रिश्ते हो कर भी अपने नहीं होते, 
उनसे शिकायत कैसी और गिला कैसा...

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...