जितनी शिद्दत से तूने
कभी थामा था हाथ मेरा
आज उतनी ही बेख्याली
से तुमने दामन है छुड़ाया
ना जाने किस बदगुमानी
मे खोए बैठे हो तुम,
अपनी ही चाहत को
रूसवा किए हो तुम...
#SwetaBarnwal
कभी थामा था हाथ मेरा
आज उतनी ही बेख्याली
से तुमने दामन है छुड़ाया
ना जाने किस बदगुमानी
मे खोए बैठे हो तुम,
अपनी ही चाहत को
रूसवा किए हो तुम...
#SwetaBarnwal
No comments:
Post a Comment