कुछ इस कदर गुज़र रही है ज़िन्दगी अपनी,
हर ओर अंधेरा नज़र आ रहा है,
सबकुछ पाने की चाहत में,
बहुत कुछ फिसलता जा रहा है...
#SwetaBarnwal
हर ओर अंधेरा नज़र आ रहा है,
सबकुछ पाने की चाहत में,
बहुत कुछ फिसलता जा रहा है...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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