किसी और के लिए इन आँसुओं को कभी बेकार ना कर,
जो करे ना इसकी कद्र उसके लिए ना ख़ुद को बेज़ार कर,
शीशा-ए-दिल ही यहां अक्सर टूट कर बिखरा करते हैं,
फौलाद-ए-ज़िगर आई मुश्किलों से निखर जाते हैं यहाँ,
चाहे कोई भी रूठ जाए छुट जाए हम इंसानों से,
मुश्किलें कभी रूठ कर पीछा छोड़ा नहीं करते हैं यहाँ,
ये आँसू चाहे कैसे भी हो उनसे प्यार किया करो,
जाने कब कौन और कैसे हमारी आत्मा को नहला जाए,
कहती है #श्वेता करो ना खुशामद कभी भी किसी सफ़र की,
हर मोड़ पर साथ अक्सर हमारे हौसले ही दिया करते हैं,
दुनिया की नज़रों में गिर कर भी उठ सकता है इंसान,
जो गिर जाए अपनी ही नज़र में तो कौन उठाए भला उसे,
खुद को करो इस कदर तैयार कि हर मुश्किल आसान हो जाए,
करो हर चुनौतियों को स्वीकार, जाने कब कहाँ किनारा मिल जाए...
#SwetaBarnwal
जो करे ना इसकी कद्र उसके लिए ना ख़ुद को बेज़ार कर,
शीशा-ए-दिल ही यहां अक्सर टूट कर बिखरा करते हैं,
फौलाद-ए-ज़िगर आई मुश्किलों से निखर जाते हैं यहाँ,
चाहे कोई भी रूठ जाए छुट जाए हम इंसानों से,
मुश्किलें कभी रूठ कर पीछा छोड़ा नहीं करते हैं यहाँ,
ये आँसू चाहे कैसे भी हो उनसे प्यार किया करो,
जाने कब कौन और कैसे हमारी आत्मा को नहला जाए,
कहती है #श्वेता करो ना खुशामद कभी भी किसी सफ़र की,
हर मोड़ पर साथ अक्सर हमारे हौसले ही दिया करते हैं,
दुनिया की नज़रों में गिर कर भी उठ सकता है इंसान,
जो गिर जाए अपनी ही नज़र में तो कौन उठाए भला उसे,
खुद को करो इस कदर तैयार कि हर मुश्किल आसान हो जाए,
करो हर चुनौतियों को स्वीकार, जाने कब कहाँ किनारा मिल जाए...
#SwetaBarnwal
No comments:
Post a Comment