Sunday, 8 April 2018

कहानी सोलहवें साल की

(एक लड़की की अभिव्यक्ति) 


आओ सुनाती हूँ मैं तुम्हें कहानी 
अपनी वो सोलहवें साल की,

बसंती हवा सी चंचल, मादक
मनमोहक मदमस्त हवा सी  मैं, 
गगन मुखमण्डल आभामंडीत हृदय, 
प्रेम पुञ्ज से आलोकित, पग-पग मे चांदनी, 


आओ सुनाती हूँ मैं तुम्हें कहानी 
अपनी वो सोलहवें साल की,

चाँद और आफताब की बातें करने वाली 
हर वक़्त कल्पनाओं मे डूबा रहता मन,
चिड़ियों सी चहकती, तितलियों सी नाचती
रूप की रानी थी मृगनयनी सा था ये तन,

आओ सुनाती हूँ मैं तुम्हें कहानी 
अपनी वो सोलहवें साल की,

ओस के बूंदों जैसी निर्मल, मुक्ता सी रौनक,
इंद्रधनुषी आभा जैसी, मदहोश नवयौवन,
जो देखे मंत्रमुग्ध हो जाए बन भँवरों सा दिवाना,
गंगा सी पावन धारा और सीता जैसी मोहकता,

आओ सुनाती हूँ मैं तुम्हें कहानी 
अपनी वो सोलहवें साल की...

#SwetaBarnwal 

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