Thursday, 26 April 2018

कुछ इस कदर गुज़र रही है ज़िन्दगी अपनी,
जैसे सांसे भी नाप तोल कर दी हो ऊपर वाले ने...

#SwetaBarnwal

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...