कठिन हुआ जब जीवन का रस्ता,
माँ की गोद तब आई याद,
बंद मिले जब सारे दरवाज़े,
पिता का दामन तब आया याद...
#SwetaBarnwal
माँ की गोद तब आई याद,
बंद मिले जब सारे दरवाज़े,
पिता का दामन तब आया याद...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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