झूठी ख्वाहिशें और अधूरे ख्वाब
पे हम ज़िंदा हैं,
ऐ ज़िन्दगी...!
हम तुझसे थोड़े से शर्मिंदा हैं...
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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