Tuesday, 12 December 2017

वक़्त नहीं....

हर वक़्त बदलती दुनिया में, अपने लिए वक़्त नहीं... 
पल-पल मरते लोगों मे, जीने का भी वक़्त नहीं...

माँ से प्यार बहुत है, पर माँ को "माँ" कहने का वक़्त नहीं...
याद बहुत आती है बाबा की, पर बूढ़ी आँखों के लिए वक़्त नहीं...

यूँ तो खुशियाँ बहुत है पर, ख़ुश होने का भी वक़्त नहीं...
अहसासों को मार चुके हम, अब उन्हें जलाने का भी वक़्त नहीं... 

Social media पे दुनिया से जुड़े हैं, पर अपनों के लिए वक़्त नहीं... 
दोस्तों की लम्बी फौज है, पर दोस्तों के लिए वक़्त नहीं... 

पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े, साँसें लेने का भी वक़्त नहीं...
पैर बहुत थके हैं लेकिन रुकने का भी वक़्त नहीं,

दिल में दर्द हज़ारों हैं, पर रोने का भी वक़्त नहीं...
सोना चाहें ख़ूब मगर पर सोने का भी वक़्त नहीं....

हर वक़्त बदलती दुनिया में, अपने लिए वक़्त नहीं... 
पल-पल मरते लोगों मे, जीने का भी वक़्त नहीं...

#SwetaBarnwal 

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