Thursday, 28 December 2017

इंतज़ार...

अब तो किसी अपने से भी, 
प्यार नहीं होता, 
किसी मुसाफिर का कोई, 
ऐतबार नहीं होता... 

होते हैं बस रिश्तों में 
समझौते यहां,
किसी को किसी से भी 
प्यार नहीं होता... 

दिल मे प्यार की हसरत लिए
ये उम्र गुज़र जाती है, 
कि किस्मत पे किसी का अपने
इख्तियार नहीं होता... 

जिस पल से है हमें प्यार बहुत
वो अक्सर हमारे ख्यालों मे होता, 
हक़ीक़त मे कभी भी उनका 
यूँ दीदार नहीं होता... 

बहुत बड़ी भीड़ है लोगों की
फिर भी हम अकेले हैं, 
अपने तो कई हैं मगर
अपना समझने वाला कोई नहीं होता... 

ढल जाती है ये ज़िन्दगी
यूँ ही गम की राहों मे, 
कि #श्वेता के होंठों को अब 
किसी हंसी का इंतज़ार नहीं होता...

#SwetaBarnwal

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