अपने अहसासों को संजोती हूँ,
उसे शब्दों में पिरोती हूँ,
फिर काग़ज पे उतारती हूँ,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
कुछ दिल के अरमां संजोती हूँ,
कुछ खुशियों के पल ढूंढ लाती हूँ,
कुछ दर्द से नगमें चुराती हूँ,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
कुछ अहसास तेरे हैं तो कुछ मेरे,
सज़ा लेती हूँ जज़्बातों को अल्फाज़ों में,
पिरो देती हूँ मैं हर सुख और दुख को,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
लफ़्ज़ों से सतरंगी सपने बुन लाती हूँ,
आसमान की सबको सैर कराती हूँ,
टूटे हुए दिल में अरमान जगा जाती हूँ,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
सबकी सुनती हूँ कुछ अपनी सुनाती हूँ,
दर्द में सबको अपनी सी लगती हूँ,
रोते हुए को मैं हंसना सिखाती हुं,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
#SwetaBarnwal
उसे शब्दों में पिरोती हूँ,
फिर काग़ज पे उतारती हूँ,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
कुछ दिल के अरमां संजोती हूँ,
कुछ खुशियों के पल ढूंढ लाती हूँ,
कुछ दर्द से नगमें चुराती हूँ,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
कुछ अहसास तेरे हैं तो कुछ मेरे,
सज़ा लेती हूँ जज़्बातों को अल्फाज़ों में,
पिरो देती हूँ मैं हर सुख और दुख को,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
लफ़्ज़ों से सतरंगी सपने बुन लाती हूँ,
आसमान की सबको सैर कराती हूँ,
टूटे हुए दिल में अरमान जगा जाती हूँ,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
सबकी सुनती हूँ कुछ अपनी सुनाती हूँ,
दर्द में सबको अपनी सी लगती हूँ,
रोते हुए को मैं हंसना सिखाती हुं,
ऐसे ही नहीं मैं कविता बनाती हूँ...
#SwetaBarnwal
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