वो बला की शोख़ी देखी है तेरी नज़रो मे,
वो हुस्न, वो नजाकत, वो बेकाबू जुल्फों की घटा,
क्या क्या बयान करूं मैं ऐ शोख हसीना,
हर बात बेमिसाल है तेरे हुस्न की...
#SwetaPrakash
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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